जैसे मां पुत्र की रक्षा करती है वैसे ही भगवान भक्त की रक्षा करता अनूप महाराज, पंचम वेद महाभारत की वीर गाथा सुनाते हुए अनूप ठाकुर महाराज

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जिला फर्रूखाबाद के मिनी कुंभ पांचाल घाट मेला श्री राम नगरिया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को असलापुर धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने भक्त और भगवान की एक अनोखी मिशाल प्रस्तुत करते हुए पंचम वेद महाभारत भीष्म प्रतिज्ञा के रूप में सुनाया कि भीष्म ने कौरवों के द्वारा षड़यंत्र रचे जाने पर ये प्रतिज्ञा कर ली कि कल सुबह के युद्ध में वह पांडवों को मार डालेंगे। इससे घबराकर पांडव भगवान कृष्ण की शरण में पहुंचे उधर, द्रोपदी ने भगवान से प्रार्थना की कि बिना पतियों के जीने का क्या मतलब है कृष्ण ने कहा: सती होने के लिये मन में किसी के प्रति द्वेष भाव नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यही भाव लेकर भीष्म के पास जाने को कहा, लेकिन द्रोपदी ने मना कर दिया। तब कृष्ण दासी बनकर स्वयं उसके साथ भीष्म के पास गये जहां भीष्म ने उसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्रदान किया।
भगवान ने अपने छलिया रूप से भीष्म को आशीर्वाद देेने के लिये विवश कर दिया क्योंकि कृष्ण जानते थे कि भीष्म ने प्रातःकाल का समय दुर्योधन की पत्नी को आशीर्वाद को देने हेतु बुला रखा है। जब भीष्म को यह पता चला कि यह तो द्रोपदी है तब उन्हें मजबूर होकर अपने प्रण को छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने छल करने वाले कृष्ण के प्रति यह प्रण किया यदि मैं युद्ध में अस्त्र न उठाने की कृष्ण की प्रतिज्ञा न तुड़वाऊ तो मैं गंगा और सांतनु का पुत्र नहीं कहलाऊंगा। युद्ध में भीष्म के भीषण बाणों के प्रभाव से जब पांडव सेना त्रस्त हो गई तो कृष्ण को रथ का पहिया शस्त्र के रूप में उठाना पड़ा। भाव यह कि कृष्ण अपने भक्तों की रक्षा के लिये अपनी प्रतिज्ञा को भी तोड़ देते है और भक्त की रक्षा करते हैं भगवान का विरद हैं मोर बचन चाहें पड़ि जाय फीका, भक्त बचन पत्थर की लीका
भीष्म का पराक्रम सुन पूरा पंडाल वीर रस से ओतप्रोत हो गया जगतपाल सिंह, धनपाल सिंह,महेशपाल सिंह नृसिंह दास महाराज समेत बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहें

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