तालाब पर भाजपा नेता का कब्जा , आठ वर्ष बाद भी प्रशासन कब्जा खाली करवाने में विफल

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संवाददाता दिलीप त्रिपाठी

महमूदाबाद सीतापुर सूबे में योगी आदित्यनाथ कि सरकार बनने के बाद लगातार भू माफियाओं पर कार्यवाही की जा रही है लगातार बुलडोजर भू माफियाओं से कब्जे की जमीन मुक्त करवा रहे हैं. लेकिन महमूदाबाद कस्बे में देव स्थल हरदेवलाला के समीप स्थित तालाब पर तो अतिक्रमण और कब्जे की ऐसी नजर लगी कि उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। देव स्थान के तालाब पर कब्जे के मामले में मौजूदा भाजपा नेता सहित कई अन्य कब्जेदारों को आठ वर्ष पूर्व नोटिस जारी हुई थी , लेकिन मामले में न तो कोई कार्यवाही हुई और न ही तालाब अतिक्रमण मुक्त हो पाया। कहने को तो कहते हैं “गजब पर्दा है चिलमन से लगे बैठे हैं , साफ छुपते भी नही सामने आते भी नही…” कुछ ऐसे ही अंदाज में देवस्थान के तालाब को मुक्त कराने में स्थानीय पालिका की भूमिका रही है।
महमूदाबाद कस्बे के महमूदाबाद – बिसवां मार्ग पर हरदेव लाला देवस्थल के पड़ोस 0.164 हेक्टेयर का तालाब गाटा संख्या 96 पर अभिलेखों में दर्ज है । गाटा संख्या 96 के पास ही गाटा संख्या 99 नवीन परती , 101 बंजर तथा 104 रास्ते में दर्ज है । यह लगभग पांच बीघे की जमीन केवल अभिलेखों में ही दर्ज है वास्तविकता में इस जमीन पर कब्जे और अतिक्रमण ने ऐसा जाल बिछाया है कि यह पांच बीघा जमीन अपना अस्तित्व ही खो चुकी है । तकरीबन आठ वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश को इस मामले में कस्बे के एक समाजसेवी नागरिक ने पत्र लिखकर शिकायत की थी। ताकि इस पांच बीघे जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जा सके लेकिन सरकारी अफसरों और कब्जेदारों के बेहतरीन गठजोड़ ने इस मामले को ठंडे बस्ते में पहुंचा दिया और आठ साल बाद भी सरकारी भूमि और तालाब पर अवैध कब्जे बरकरार हैं।
जबकि आठ वर्ष पूर्व 18 नवम्बर 2013 को नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी ने सन्तोष कुमार पुत्र शान्ति प्रकाश की शिकायत पर तालाब में हुए कब्जे का संज्ञान लेते हुए वर्तमान भाजपा नेता समेत अन्य कब्जेदारों को नोटिस भेजी थी , नोटिस में बताया गया था कि तहसीलदार महमूदाबाद की रिपोर्ट के अनुसार गाटा संख्या 96 पर तालाब की भूमि में वर्तमान भाजपा नेता रामकुमार पुत्र राममनोहर निवासी नई बाजार उत्तरी ने 30×8 मीटर की भूमि पर पक्की बाउंड्री बनवा कर कब्जा कर रखा है और नोटिस में तत्काल इस अवैध कब्जे को मुक्त कराने की बात भी अंकित थी। पर सिस्टम की कार्यशैली तो देखिए आज इस नोटिस के आठ साल बीत जाने के बाद भी भाजपा नेता रामकुमार से तालाब की भूमि पर किये गए कब्जे को खाली नही करवाया जा सका है।
आखिर आठ साल बाद भी तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त न करवा पाने के पीछे की कहानी को लेकर संशय बरकरार है , लेकिन दबी जुबान लोगों का मानना है कि अफसरों से लेकर नेताओं तक का यह गठजोड़ इस कब्जे की हकीकत है।

आखिर क्यों कब्जा खाली करवाने में विफल रही नगर पालिका-

आम लोगों का कहना है कि जब आज से आठ वर्ष पूर्व शिकायत पर तहसीलदार महमूदाबाद ने अपनी रिपोर्ट में अवैध कब्जे को खाली कराने की बात पालिका को पत्र के माध्यम से लिखी थी , साथ ही पालिका ने पत्रांक 212/शि.नि./2013-14/न.पा.परि.मह. के माध्यम से कब्जेदार भाजपा नेता को नोटिस तामील भी कराई थी तो इस कब्जे को मुक्त क्यों नही कराया जा सका। चर्चा है कि अफसरों को चढ़ावा चढ़ा कर तालाब पर कब्जे और नोटिस के मामले को ठंडे बस्ते में पहुंचा दिया गया था ।

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