बहुत से उम्मीदवारों के मंसूबों पर आरक्षण सूची जारी होते ही फिरा पानी, अब दर्ज होंगी आपत्तियां

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लखनऊ । दिन में तापमान बढ़ने और तेज हवाएं चलने से रबी फसलों को नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है, बशर्तें सतर्कता बरती जाए। खासकर गेहूं की फसल को बचाने के लिए खेत में हल्की सिंचाई करें। इससे गेहूं का दाना पतला पड़ने और खड़ी फसल गिरने की खतरा टल जाएगा। चना, मटर और मसूर जैसी फसलों पर मौसम की गर्माहट से विशेष खतरा नहीं है। केवल तैयार सरसो की फसल में अधिक सिंचाई की गई तो गिरने की आशंका रहेगी।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीपी श्रीवास्तव कहते है कि तामपान बढ़ा जरूर है, लेकिन रात्रि में पारा 16-17 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। ऐसे में दिन की गर्मी 27 डिग्री से ज्यादा भी हो जाती है तो भी फसलों को अधिक नुकसान नहीं होगा। उनका कहना है कि गर्मी सात से आठ घंटे रहती है, जबकि शेष समय मौसम फसलों के अनुकूल रहता है। खतरा गेहूं व सरसो की फसल को है। किसानों को डर है कि मौसम में नमी कम होने से दाना कमजोर रह जाएगा। ऐसे हालात में किसान खेतों में अधिक सिंचाइ करेगा तो तेज हवाओं से फसल गिर जाएगी और उत्पादन घट जाएगा।

मऊ के किसान देवप्रकाश राय कहना है कि गर्मी बढ़ने से गेहूं को नुकसान हो सकता है परंतु चना, मटर, मसूर व सरसों फसलें जल्दी पक जाएगी। इनकी कटाई हो जाएगी तो ओलावृष्टि या अधिक वर्षा होने का डर खत्म हो जाएगा। बता दें कि गत वर्ष मार्च के दूसरे सप्ताह में वर्षा व ओला गिर जाने से फसलों को अधिक नुकसान हुआ था।

कृषि अधिकारी डॉ. सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि हवा चलने से फिलहाल फसलों को कोई नुकसान पहुंचने का अंदेशा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरसो, चना जैसी फसलें लगभग तैयार हो चुकी हैं। यदि बारिश के साथ ओले पड़ जाएं तब खेती को नुकसान पहुंच सकता है। सोमवार को अधिकतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो सामान्य के मुकाबले चार डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से चार डिग्री अधिक 16.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आगे दो से तीन दिन तक मौसम लगभग ऐसा ही रहने की उम्मीद है।

लखनऊ । दिन में तापमान बढ़ने और तेज हवाएं चलने से रबी फसलों को नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है, बशर्तें सतर्कता बरती जाए। खासकर गेहूं की फसल को बचाने के लिए खेत में हल्की सिंचाई करें। इससे गेहूं का दाना पतला पड़ने और खड़ी फसल गिरने की खतरा टल जाएगा। चना, मटर और मसूर जैसी फसलों पर मौसम की गर्माहट से विशेष खतरा नहीं है। केवल तैयार सरसो की फसल में अधिक सिंचाई की गई तो गिरने की आशंका रहेगी।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीपी श्रीवास्तव कहते है कि तामपान बढ़ा जरूर है, लेकिन रात्रि में पारा 16-17 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। ऐसे में दिन की गर्मी 27 डिग्री से ज्यादा भी हो जाती है तो भी फसलों को अधिक नुकसान नहीं होगा। उनका कहना है कि गर्मी सात से आठ घंटे रहती है, जबकि शेष समय मौसम फसलों के अनुकूल रहता है। खतरा गेहूं व सरसो की फसल को है। किसानों को डर है कि मौसम में नमी कम होने से दाना कमजोर रह जाएगा। ऐसे हालात में किसान खेतों में अधिक सिंचाइ करेगा तो तेज हवाओं से फसल गिर जाएगी और उत्पादन घट जाएगा।

मऊ के किसान देवप्रकाश राय कहना है कि गर्मी बढ़ने से गेहूं को नुकसान हो सकता है परंतु चना, मटर, मसूर व सरसों फसलें जल्दी पक जाएगी। इनकी कटाई हो जाएगी तो ओलावृष्टि या अधिक वर्षा होने का डर खत्म हो जाएगा। बता दें कि गत वर्ष मार्च के दूसरे सप्ताह में वर्षा व ओला गिर जाने से फसलों को अधिक नुकसान हुआ था।

कृषि अधिकारी डॉ. सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि हवा चलने से फिलहाल फसलों को कोई नुकसान पहुंचने का अंदेशा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरसो, चना जैसी फसलें लगभग तैयार हो चुकी हैं। यदि बारिश के साथ ओले पड़ जाएं तब खेती को नुकसान पहुंच सकता है। सोमवार को अधिकतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो सामान्य के मुकाबले चार डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से चार डिग्री अधिक 16.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आगे दो से तीन दिन तक मौसम लगभग ऐसा ही रहने की उम्मीद है।

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