भक्ति से भगवान और भक्त दोनों को मिलता है आनंद :- जय नारायण शास्त्री

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नैमिषारण्य स्थित मनु सतरूपा तपःस्थली, व्यासगद्दी में सप्तदिवसीय भागवत कथा एवं पंच कुंडीय यज्ञ महोत्सव के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया । भागवत व्यास जयनारायण शास्त्री ने कृष्ण जन्म का भावपूर्ण वर्णन किया ।
मनु सतरूपा तपःस्थली प्रमुख ऋतवृत शास्त्री के सानिध्य में चल रही भागवत कथा में कथाव्यास ने कृष्ण जन्म से पूर्व राम चरित का संक्षिप्त रूप से वर्णन किया । उन्होंने कहा कि भगवान् अपनी ओरसे भक्ति नहीं देते, पर कोई भक्ति ही चाहे तो वे भक्ति देकर बड़े प्रसन्न होते हैं क्योंकि भक्तिसे भगवान् और भक्त‒दोनोंको ही आनन्द मिलता है, इसलिये भगवान् भक्ति चाहने वाले को भक्ति देकर स्वयं उसके दास बन जाते हैं । दसवें स्कन्ध में प्रवेश करते हुए उन्होंने बताया कि ईश्वर का अवतार पृथ्वी का पाप हरण करने के लिए होता है, जब कंस के द्वारा पाप बढ़ गया तब भगवान कृष्ण देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्में । कथा समापन में मुख्य यजमान कुलदीप सिंह ठाकुर, पुष्पा देवी ठाकुर ने व्यास पूजन किया । इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण शास्त्री, विक्रान्त द्विवेदी, श्रीनारायण शास्त्री मौजूद रहे ।

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