यूपी सरकार ने रिटायर्ड जज की निगरानी में गिरधारी मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश दिए

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लखनऊ। लखनऊ के बहुचर्चित अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपित गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर की 15 फरवरी को पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की अब न्यायिक जांच होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इसका फैसला किया है। गिरधारी मुठभेड़ की न्यायिक जांच उच्च न्यायलय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पंकज जायसवाल करेंगे।

अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपित गिरधारी विश्वकर्मा की लखनऊ के विभूतिखंड थानाक्षेत्र में पुलिस से हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस मामले में सीजेएम कोर्ट ने आजमगढ़ के वकील सर्वजीत यादव की अर्जी पर सुनवाई करते हुए 26 फरवरी को गिरधारी की मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज किए जाने का आदेश दिया था। अर्जी में पुलिसकर्मियों पर गिरधारी की हत्या का आरोप लगाया गया था। हालांकि, इस फैसले पर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज किए जाने पर रोक लगा दी थी। अजीत हत्याकांड के षड्यंत्र में पूर्व सांसद धनंजय सिंह की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस ने धनंजय सिंह पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसके बाद धनंजय सिंह ने प्रयागराज में कोर्ट में समर्पण कर दिया था। धनजंय सिंह वर्तमान में नैनी जेल में निरुद्ध हैं।

यह थी पूरी घटना : लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र में कठौता चौराहे के पास छह जनवरी को मऊ के ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अजीत सिंह के साथी मोहर सिंह ने गिरधारी, आजमगढ़ जेल में बंद कुंटू सिंह और बरेली जेल में निरुद्ध अखंड सिंह के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में लखनऊ पुलिस आरोपित गिरधारी को तिहाड़ जेल से तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लाई थी। पुलिस का दावा है कि 15 फरवरी की सुबह गिरधारी को अजीत हत्याकांड में प्रयुक्त असलहा बरामद कराने के लिए ले जाया जा रहा था। रास्ते में गिरधारी ने उपनिरीक्षक की सर्विस पिस्टल छीनकर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की और अभिरक्षा से भाग निकलने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों की जवाबी फायरिंग में गिरधारी मारा गया था।

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