लोगों के साथ वन विभाग को भी डीएम धीराज गब्र्याल से उम्मीद, मिल सकती है कारतूस खरीदने की अनुमति

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हल्द्वानी : डीएम धीराज गब्र्याल से लोगों के साथ दो डिवीजनों के अफसरों को भी उम्मीद है। पूर्व में नैनीताल के डीएम रहे सविन बंसल ने कई बार अर्जी के बावजूद वन विभाग को सरकारी असलहों के लिए कारतूस खरीदने की अनुमति नहीं दी थी। जबकि जंगल सुरक्षा जैसा अहम दायित्व निभाने वाले वन विभाग को असलहों की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। इसलिए वन विभाग ने डीएम के समक्ष कारतूस खरीद की अनुमति पाने के लिए अर्जी लगा दी है। उम्मीद है कि जल्द कारतूस मिल भी जाएंगे।

तराई का जंगल हर दृष्टि से संवेदनशील है। खनन व लकड़ी कारोबार के कारण दोनों तरह के तस्कर यहां सक्रिय रहते हैं। खैर, सागौन व शीशम पर तराई से लेकर उप्र व हरियाणा तक के तस्करों की नजर रहती है। इसके अलावा वन्यजीवों की हिफाजत को लेकर भी अलर्ट रहना पड़ता है। वेस्टर्न सर्किल की डिवीजनों का जंगल उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल सीमा तक से सटा हुआ है। गश्त व सुरक्षा के लिए रेंज स्तर पर सरकारी असलहा दिया जाता है।

हालांकि, कई स्टाफ व्यक्तिगत लाइसेंस बनाकर निजी असलहा भी रखते हैं। वहीं, सरकारी असलहे के कारतूस को लेकर डीएम कार्यालय में पूरा रिकार्ड जमा करना पड़ता है। कारतूस खत्म होने पर डीएम द्वारा लिखित अनुमति देने पर ही खरीद हो सकती है। पिछले साल हल्द्वानी वन प्रभाग व तराई केंद्रीय डिवीजन में कारतूस की शार्टेज होने पर डीएम कार्यालय में अनुमति पत्र भेजा गया था। मगर तत्कालीन डीएम सविन बंसल ने फारेस्ट की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। इसलिए फारेस्ट अफसरों ने अब दोबारा पत्र भेजा है।

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