ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रह. का 809वां उर्स मुबारक। कुल की रस्म के साथ फ़हुई अमन, चैन और खुशहाली की दुआ।

0
137

अजमेर। महान सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रह. के 809वां उर्स मुबारक की कुल की रस्म अदा की गई, इसी के साथ जन्न्ाती दरवाज़ा भी बंद हो गया और मुल्क में अमन चैन और खुशहाली के साथ पूरी दुनिया को कोरोना महामारी से निजात के लिए खास दुआ की गई।
दरगाह शरीफ़ में उर्स की रौनक देर रात से ही दिखना शुरू हो गई थी, जाएरीने ख्वाजा बड़ी तादात में दरगाह शरीफ़ पहुंचे और अपनी मोहब्बतों के नज़राने पेश करते हुए नज़र आए। सुबह फज्र की नमाज़ सें ही जाएरीन उर्स में शामिल होने के लिए अपनी जगह बनाते हुए देखे गए। सुबह 11 बजे महफिल खाने में सज्जादानशीन साहब की सदारत में शाही कव्वाल असरार अहमद खान ने हमराहियों के साथ हजरत अमीर खुसरों का रंग पढ़ा। तक़रीबन सवा बारह बजे महफिल खत्म हुई और सज्जादानशीन साहब मज़ार शरीफ़ पर फातेहा के लिए पहुंचे। इसी दरमियान मलंग और कलंदर हज़रात क़दीमी छतरी गेट से महफिल खाने पहुंचते हुए दागौल की रस्म अदा की। इन तमाम रस्मों के दौरान दरगाह कमेटी मौरूसी अमले की जानिब से दरगाह शरीफ़ की क़दीमी रस्मों को अंजाम दिया गया। जहाँ शाहजहानी पर वाके नक्कार खाने से शादियाने बजाए गए वहीं बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप दागी गई। इस दौरान कई दरगाहों और खानक़ाहों के सज्जादानशीन और सूफी हज़रात ने शिरकत की।

दरगाह कमेटी सदर अमीन पठान ने उर्स की कामयाबी के लिए जिला प्रशासन और दरगाह दफ्तर का किया शुक्रिया: उर्स के मौके़ पर दरगाह कमेटी सदर अमीन पठान ने सभी को उर्स की मुबारकबाद पेश करते हुए, ख्वाजा साहब की तालीमात पर अमल करने की गुज़ारिश की। उर्स के कामयाब होने की खुशी में पठान ने नाज़िमे दरगाह अशफ़ाक़ हुसैन और जुमला मुलाजामिन को मुबारकबाद पेश की। पठान के मुताबिक गुजिश्ता कोरोना की वजह से सालों के मुकाबले इस साल उर्स के इंतेज़ामात को पूरा करवाना एक मुश्किल काम था जिसे ख्वाजा साहब के करम से सभी ने बखुबी अंजाम दिया। उर्स के मौके पर नायब सदर सैयद बाबर अशरफ भी मौजूद रहे।

सुरक्षा के रहे खास इंतेज़ाम: जाएरीन की सहूलत और हिफ़ाजत के मद्देनज़र जिला इंतेज़ामिया ने भी भरपूर ताउन किया। बड़ी तादात में जहाँ पुलिस के जवान तैनात किए गए वहीं हर मुकाम और रस्म को अदा करने को लेकर मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई। निगरानी के लिए 85 से अधिक कैमरे दरगाह शरीफ़ मंे लगे हुए थे। जिसकी 24 घंटे निगरानी तर्जुबेकार जिम्मेदार के जरिय की गई।

विश्रामसस्थली में दिखा चिश्ती रंग।
जाएरीन ने अदा की जुमे की नमाज़। हुई छठी की फातेहा।
ग़रीब नवाज़ मेहमान खाना (विश्रामस्थली) पर पढ़ी गई जुमे की नमाज़: दरगाह कमेटी और जिला प्रशासन के सहयोग से हर साल की तरह इस साल भी रा. रा. 8 के समीप ग़रीब नवाज़ मेहमान खाने में जायरीन के ठहरने और खाने का मुफ्त इंतेज़ाम किया गया। गुजिश्ता सालों के मुक़ाबले इस साल जाएरीन की तादात कम रही। लेकिन दरगाह कमेटी और जिला इन्तेज़ामिया की ओर से जाएरीन की सहूलत के लिए पूरे इंतेज़ाम किए गए जिसमें पानी, बिजली, रिहाईश के अलावा, प्रशासनिक कैम्प, अस्थाई बाज़ार, मुफ्त चार्जि़ग, लंगर, मास्क, वगैराह का इंतेज़ाम शामिल है।

हुई छठी की फातेहा: विश्रामस्थली पर सुबह 10 बजे छठी शरीफ़ की फातेहा हुई। इस मौके पर सुन्नी दावते इस्लामी के सैयद शाकिर नूरी ने ख्वाजा साहब के अमल पर अपना बयान किया और सभी की सेहत और खुशहाली के लिए दुआ की।
अदा की गई जुमे की नमाज़: विश्रामस्थली पर जुमे की नमाज़ अदा की गई, नमाज़ में हज़ारों की तादात में नमाजियों ने शिरकत की। इस मौके पर अमीनुल कादरी ने ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रह. की जिन्दगी और तालिमात के बारे में बयान किया वहीं नमाज मौलाना ज़ाकिर शम्सी ने पढ़ाई।

सीसीटीवी कैमरे से कि गई निगरानी: विश्रामस्थली पर भी जाएरीन की हिफ़ाज़त के लिए पुलिस का जाब्ता तैनात किया गया था और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिससे 24 घंटे निगरानी की गई।
बसों की पार्किंग: ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रह. के उर्स में इस पिछले सालों के मुक़ाबले में बहुत कम जाएरीन आए जिसकी खास वजह कोविड को बताया गया है। जहां पिछले साल उर्स के अवसर पर 1500 से अधिक बसें आई थी वही इस साल केवल 178 बसें ही अब तक आई है। इन बसों में सबसे अधिक 110 बसे उत्तर प्रदेश से है।

सफ़ल रहा केसरगंज स्थित ईदगाह पार्किंग का इंतेज़ाम: जिला प्रशासन के मश्वरे के अनुसार दरगाह कमेटी द्वारा शहर के बीच में इस बार केसरगंज स्थित ईदगाह के पिछले हिस्सें रिआयती दर पर चैपहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की गई। इस व्यवस्था से जाएरीन को बहुत सुविधा रही, क्योंकि ब्यावर रोड़ से आने वाले जाएरीन को गर्वमेंट काॅलेज के समीप ही अपनी गाड़ी को खड़ी करने का मुकाम मिल गया। क्योंकि इस बार शहर में स्मार्ट सिटी के तहत ओवर ब्रिज का काम रेल्वे स्टेशन से आगारा गेट तक चालू है जिससे जाएरीन और शहर के ट्रेफिक व्यवस्था काफी प्रभावित होने की संभावना थी। लेकिन ईदगाह पार्किंग ने शहरवासियों के साथ जाएरीन को भी सुविधा उपलब्ध करवाई ताकि वह डिग्गी होते हुए सीधे दरगाह पहुंच सके। पिछले दो दिनों में 600 से अधिक जाएरीन ने वहां पर अपने वाहनों को खड़ा किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here