गाजियाबाद: ट्विटर के बाद गूगल भी लाइन में

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उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक को सीआरपीसी की धारा 166 के तहत नोटिस भेजकर लोनी मामले की जांच में शामिल होने के लिए कहा है. इसके पहले 31 मई को दिल्ली पुलिस ने टूलकिट मामले में बंगलोर जाकर ट्विटर के एमडी से 2 घंटे तक पूछताछ की थी. लोनी में फेसबुक लाइव कर धार्मिक भावनाएं भड़काने व सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज करके आरोपियों की तलाश में दबिश शुरू कर दी है. इस लाइव के लिए ट्विटर की तर्ज पर फेसबुक को भी पुलिस जांच के लिए बुलाया जा सकता है.

पिछले साल जनवरी 2020  की हिंसा के लिए गूगल और व्हाट्सएप से फोटोस और वीडियोस शेयर करने के अनेक विवरणों की दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मांग की थी. इसके जवाब में गूगल ने कहा कि ऐसा कोई भी विवरण अदालती आदेश के बाद ही दिया जा सकता है. व्हाट्सएप तो निजता के पर्दे की आड़ में पुलिस और खुफिया एजेंसियों को लगातार ठेंगा दिखाता आ रहा है. ऐसे मामलों में पुलिस के सामने आ रही उलझनों को समग्र तौर पर समझा जाय तो ट्विटर के अधिकारियों के साथ संसदीय समिति की कार्रवाई बहुत ही प्रासंगिक हो सकती है. कांग्रेसी सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के सदस्यों ने ट्विटर की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक ढांचे को समझने के साथ ट्विटर के अधिकारियों से यह साफ़ कर दिया कि अमेरिकी कंपनी भारत के कानून से ऊपर नहीं है. सभी सोशल मीडिया कंपनियों का ढांचा और कार्यप्रणाली एक जैसी है, इसलिए ट्विटर के बाद, फेसबुक, व्हात्सप्प और गूगल को आगे चलकर पुलिस जांच और ऐसे सवालों से जूझना पड़ सकता है-

गोविंदाचार्य मामले में हाईकोर्ट का साल पुराना आदेश

संघ के पूर्व प्रचारक के. एन. गोविंदाचार्य की याचिका पर अगस्त 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट ने फेसबुक और गूगल समेत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया था. भारत के कानून के साथ खिलवाड़ करते हुए फेसबुक ने आयरलैंड में और गूगल और ट्विटर ने अमेरिका में अपने शिकायत अधिकारियों की नियुक्ति कर दी थी. तत्कालीन यूपीए  और उसके बाद एनडीए की सरकार ने इन कंपनियों पर कानून के अनुपालन की सख्ती नहीं बरती, जिसकी वजह से अब ये कंपनियां खुद को कानून से ऊपर समझने लगी हैं.

कई साल के लंबे विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2021 में नए आईटी नियम बनाएं, जिन्हें 3 महीने के भीतर सभी कंपनियों को लागू करना था. इन नियमों को बनाने से पहले सोशल मीडिया कंपनियों और सभी स्टेकहोल्डर से खासा विमर्श किया गया था. इसके बावजूद टेक कंपनियों द्वारा भारत के नियमों के पालन से नानुकुर करना हैरतअंगेज है.

फेसबुक, व्हाट्सएप और गूगल के इंटरमीडियरी दर्जे पर भी सवाल

नए नियमों के तहत टेक कंपनियों को भारत में शिकायत अधिकारी, नोडल अधिकारी और कंप्लायंस अधिकारी की नियुक्ति करना है. ट्विटर ने कहा है कि पुराने क़ानून के तहत उनका पूर्णकालिक शिकायत अधिकारी पहले से ही अमेरिका में नियुक्त है. अब नए नियमों के तहत ट्विटर ने भारत में तीसरे व्यक्ति को अंतरिम तौर पर अपना शिकायत अधिकारी नामांकित किया है. सरकार के निशाने पर ट्विटर है लेकिन देखा जाए तो फेसबुक व्हाट्सएप और गूगल जैसी कंपनियों ने भी नए नियमों का पूरा पालन नहीं किया है. गूगल का शिकायत अधिकारी अभी भी अमेरिका में हैं. जबकि फेसबुक और व्हाट्सएप ने ट्विटर की तर्ज पर ही अनाधिकारिक पते पर तीसरे व्यक्ति को अपना शिकायत अधिकारी बता दिया है. ट्विटर समेत सभी टेक कंपनियां जिस तरीके से नए नियमों के साथ आंख मिचोली कर रही हैं, उससे इन सभी कंपनियों के इंटरमीडियरी यानी मध्यस्थ दर्जे के कानूनी सुरक्षा कवच (सेफ हार्बर) पर गाज गिर सकती है.

संसदीय समिति की फटकार

अमेरिका की तुलना में भारत की संसदीय समितियों की भूमिका सीमित रहती है. सोशल मीडिया कंपनियों के एकाधिकारवाद और टैक्स चोरी के मामलों में अमेरिकी संसद की समितियां मुखर और प्रभावी कारवाई कर रही हैं. उसी तर्ज पर भारत में भी संसदीय समिति ने सक्रिय होकर सोशल मीडिया कंपनियों के अधिकारियों को तलब करना शुरू किया है. टूलकिट विवाद पर दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान ट्विटर ने कहा था कि भारत में उनका सिर्फ मार्केटिंग ऑफिस ही है. फेसबुक, व्हाट्सएप और गूगल के अधिकारयों द्वारा भी पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों को नियमित तौर पर ऐसे तोतारटंत जवाब दिए जाते हैं.

सोशल मीडिया कंपनियों पर जुर्माना

इन परिस्थितियों में यह सवाल खड़ा होता है कि भारत की कंपनी और अधिकारी यदि सिर्फ मार्केटिंग से संबंधित हैं तो फिर उन्हें सरकार और संसदीय समिति के सामने पेश होने की मोहलत कैसे मिलती है? केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री के बयानों से जाहिर है कि नए नियमों का पालन नहीं करने पर टि्वटर समेत अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को इंटरमीडियरी के तहत हासिल कानूनी सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा. जबकि संसदीय समिति ने नए नियमों का पालन नहीं करने पर ट्विटर पर जुर्माना लगाने की धमकी दी है. कानून का पालन नहीं होने और डाटा चोरी के मामलों पर विदेशों की तर्ज पर भारत में भी सोशल मीडिया कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने की जरूरत है. पर सवाल यह है संसदीय समिति किस क़ानून के तहत ट्विटर और अन्य कंपनियों पर जुर्माना लगा सकती है?

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