भारत सरकार ने ‘गिव एंड टेक’ फार्मूले का प्रस्ताव किया

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नई दिल्ली। यूरोपियन यूनियन की तरफ से भारत निर्मित वैक्सीन कोविशील्ड व कोवैक्सीन को डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट में शामिल नहीं किये जाने से उपजी समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने ‘गिव एंड टेक’ फार्मूले का प्रस्ताव किया है। यानी अगर यूरोपीय यूनियन (ईयू) भारत की वैक्सीन को वहां आने जाने के लिए प्रमाणित करते हैं तो भारत भी उसकी तरफ से दी जाने वाली डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट को वीजा देने में प्राथमिकता देगा। इस सर्टिफिकेट को हासिल करने वाले यूरोपीय नागरिकों को भारत में क्वारंटीन में भी नहीं रहना पड़ेगा।दोनों पक्षों में बातचीत जारीविदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच इस बारे में बातचीत जारी है।अगले कुछ दिनों में सकारात्मक समाधान निकाले जाने की संभावना है। यह पूरी समस्या तीन दिन पहले ईयू की तरफ से डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट (ग्रीन पास) जारी करने से संबंधित नियम से पैदा हुई है। इस वयवस्था में भारत निर्मित वैक्सीन को शामिल नहीं किया गया है। वैसे यूरोपीय यूनियन ने चीन की वैक्सीन को भी शामिल नहीं किया है लेकिन भारतीय वैक्सीन शामिल नहीं किए जाने से यूरोपियन यूनियन जाने वाले भारतीयों को भविष्य में परेशानी होने की आशंका है।हर देश नियम बनाने के लिए स्‍वतंत्रहालांकि यूनियन ने कल यह सफाई दी थी कि उसके ग्रीन पास संबंधी नियम में किसी वैक्सीन का नाम शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरी वैक्सीन लेने वालों को वहां एंट्री की इजाजत नहीं होगी। ग्रीन पास के यूरोपियन यूनियन के भीतर सदस्य देशों के बीच आने जाने में सहूलियत करने के लिए यह रास्ता निकाला गया है। हर देश अलग से जिन लोगों को इंट्री देनी है या नहीं देनी है, इसका नियम बनाने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन इसके बावजूद भारत निर्मित वैक्सीन लेने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।पहली जुलाई से लागू होगा यह फ्रेमवर्कडिजिटल कोविड सर्टिफिकेट फ्रेमवर्क पहली जुलाई से लागू होने वाला है। इस फ्रेमवर्क में फाइजर, माडर्ना, एस्ट्राजेनेका जैसी वैक्सीन को शामिल किया गया है। इन सभी वैक्सीन को यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी (ईएमए) से स्वीकृति दी गई है। ये वैक्सीन लेने वालों को ईयू के भीतर आने-जाने की छूट होगी। भारत निर्मित वैक्सीन को ईएमए से मंजूरी नहीं मिली है। ईयू ने कहा था कि 28 जून, 2021 तक कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी ने उसके पास आवेदन ही नहीं किया।कोविशील्ड और कोवैक्सीन को शामिल करेंविदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार ने ईयू से आग्रह किया है कि कोविशील्ड व कोवैक्सीन को भी सर्टिफिकेट फ्रेमवर्क में शामिल किया जाए। भारत की कोविन पोर्टल की तरफ से दी जाने वाली सर्टिफिकेट को अनुमित दी जाए। इसके बदले भारत भी यूरोपीय यूनियन की तरफ से दी जाने वाली सर्टिफिकेट को मान्यता देगा और कोविन पोर्टल भी उसे स्वीकार करेगा।

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