योगी की राजनीति और प्रशासन प्रबंधन का तरीका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलता जुलता है

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पिछले दो महीने से उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए पशोपेश की स्थिति बनी हुई थी. लगातार अस्थिरता और असहमतियों का माहौल बना हुआ था. ऐसा लग रहा था कि भाजपा में जिस चेहरे को तीसरा सबसे अहम चेहरा माना जाता है, उस चेहरे को कुछ लोग पसंद नहीं कर रहे हैं.

समन्वय और संतुलन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपनी ताकत लगा रखी थी. लगातार बैठकों का दौर, पर्यवेक्षकों का दौरा, दिल्ली में रिपोर्ट तलब और सवाल-जवाब का क्रम जारी था.

इस अस्थिरता में असहमतियों ने अवसर तलाशा और अपना विरोध लिखकर या बयान देकर दर्ज किया. केंद्रीय पर्यवेक्षकों से लगातार मुलाकातें होती रहीं और राज्य के बड़े छोटे चेहरे, विधायक और पार्टी पदाधिकारी अपने विरोधों, असहमतियों की कहानी दर्ज कराते रहे. खुद उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बयान दिया कि 2022 में पार्टी का राज्य में नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला हाइकमान को ही करना है. इसी बयान को पिछले चुनाव से पहले भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी दोहराया.

अडिग रहे योगी
लेकिन अपने विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अडिग रहे. उन्होंने न तो राज्य में कैबिनेट विस्तार की बात स्वीकारी और न ही विरोधियों के प्रति कोई लचीलापन दिखाया.

दरअसल, योगी जानते हैं कि चुनाव के मुहाने पर खड़ी भाजपा इस वक्त अस्थिरता और उनके चेहरे के बिना आगे बढ़ने का जोखिम नहीं उठा सकती. यही एक बात योगी की स्थिति को पूरी पार्टी के सामने सबसे मजबूत स्थिति में रखती है.

योगी की राजनीति और प्रशासन प्रबंधन का तरीका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलता जुलता है. नौकरशाही को मजबूत रखकर अपने हाथ में सारे घोड़ों की लगाम वाली शैली में योगी भी काम करते हैं. प्रदेश में भाजपा के लिए फिलहाल योगी से बड़ा चेहरा और कोई नहीं है. भाजपा में भी योगी का कद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बाद तीसरे स्थान पर नज़र आता है.

शायद इसीलिए ऐसी कई बातें और बदलाव जो भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व या संघ की सोच में पनप रहे थे, उन्हें भी योगी की कीमत पर लागू करने का जोखिम किसी ने भी नहीं उठाया.

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राहत की तस्वीर
भाजपा को यह भी समझ आया कि दोनों तरफ की तनातनी को लंबा खींचने से पार्टी का ही नुकसान हो रहा है. समाधान के प्रयास कहीं अस्थिरता और छवि को औऱ खराब न करें, इसके लिए ज़रूरी था कि तत्काल अस्थिरता को खत्म किया जाए.

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसी दौरान आजतक से बातचीत में कहा कि 2022 में मुख्यमंत्री का चेहरा योगी आदित्यनाथ ही होंगे. दिल्ली से भेजे गए और कैबिनेट के नए चेहरे माने जा रहे अरविंद शर्मा को पार्टी ने संगठन का दायित्व देकर गतिरोध को और विराम दिया.

मंगलवार को योगी आदित्यनाथ उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के घर पहुंचे. उनके नवविवाहित पुत्र और पुत्रवधू को आशीर्वाद दिया. केशव मौर्य के घर पहली बार गए सीएम योगी का उपमुख्यमंत्री ने शॉल पहनाकर स्वागत किया.

दोपहर के इस भोज पर योगी आदित्यनाथ, केशव मौर्य के घर पहुंचे तो वहां पार्टी और संघ के कई वरिष्ठ चेहरे भी मौजूद थे. इन्हें इस तस्वीर में देखा जा सकता है. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, डॉ कृष्णगोपाल, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे.

यह तस्वीर भाजपा, राज्य सरकार और संघ के परस्पर समन्वय और एकजुटता की तस्वीर बन गई है. भाजपा को और सीएम योगी को इस तस्वीर का इंतज़ार था. इस तस्वीर से विरोध के स्वरों को लगाम भी लगेगी और पार्टी में अब सब ठीकठाक है का संदेश कार्यकर्ताओं को मिलेगा.

इस तस्वीर से साफ है कि पार्टी फिलहाल विरोध और असहमतियों की कथा का अध्याय यहीं रोक चुकी है और अब यथास्थिति के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहती है. लोगों के बीच कमज़ोर पड़ी छवि को सुधारने का काम भी योगी ने तेज़ी से शुरू कर दिया है और जिन मोर्चों पर वो घिरे थे, उनके बारे में सकारात्मक और लोकप्रिय फैसले लेने का काम शुरू हो चुका है.

उत्तर प्रदेश में भाजपा का गतिरोध फिलहाल थम चुका है. ये तस्वीर इसका सबूत है. विरोधियों को भी संघ और भाजपा का संदेश स्पष्ट है कि अभी सारा ध्यान आगामी चुनाव पर केंद्रित करें. तस्वीर आने के कुछ ही घंटों बाद भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने भी बयान दिया है कि सीएम योगी ही यूपी में 2022 का चेहरा हैं.

योगी और भाजपा के लिए ये तस्वीर गर्मी के मौसम में कूलर की तरह है. हालांकि राजनीति का मौसम एक-सा तो नहीं रहता. लेकिन फिलहाल राहत है

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