राजनीतिक दलों की नो एंट्री, मंगलौर में किसानों की महापंचायत आज, नरेश टिकैत करेंगे संबोधित

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रुड़की/मंगलौर। हरिद्वार जिले की मंगलौर गुड़ मंडी में आज होने वाली किसानों की महापंचायत को लेकर किसानों ने कमर कस ली है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के अलावा यूनियन के बड़े नेता महापंचायत में शामिल होने मंगलौर आएंगे। वहीं, किसान नेताओं ने मंगलौर में महापंचायत स्थल का निरीक्षण किया। भाकियू नेताओं ने ऐलान किया है कि मंच पर किसी भी राजनीतिक दल के नेता को जगह नहीं दी जाएगी। न ही इस महापंचायत को राजनीतिक दलों का मंच बनने दिया जाएगा, केवल किसान ही मंच पर विराजमान होंगे। 

मंगलवार को महापंचायत को लेकर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई। उत्तराखंड किसान मोर्चा की ओर से बेलड़ा, बेलड़ी एवं सफरपुर गांव में हुई बैठक में मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड ने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है। किसान को धर्म एवं जाति के नाम पर बांटने की साजिश की जा रही है। लेकिन, इस साजिश को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंगलौर मंडी में होने वाली महापंचायत में सभी गांव से सभी बिरादरी के किसान एकजुट होकर पहुंचेंगे। किसी को भी किसानों के आंदोलन को लेकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। 

यह लड़ाई किसान की है और किसान खुद की लड़ाई लड़ने में पूरी तरह से सक्षम है। उन्होंने कहा कि अब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। वहीं मंगलौर गुड मंडी में प्रस्तावित महापंचायत स्थल पर भाकियू के प्रदेश महासचिव रवि चौधरी, जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री, किसान नेता पदम सिंह भाटी, गुलशन रोड, रामपाल सिंह आदि ने निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया। किसान नेताओं ने कहा कि महापंचायत शांतिपूर्वक तरीके से होगी। प्रशासन महापंचायत में आने वाले किसानों को रोकने का प्रयास ना करें। महापंचायत हर हाल में होकर रहेगी। 

मंगलौर मंडी में पहले भी हुई हैं महापंचायत

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत लंबे समय के बाद मंगलौर मंडी में होने वाली महापंचायत में आ रहे हैं। इससे पहले भाकियू सुप्रीमो दिवंगत चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत कई बार मंगलौर मंडी और रुड़की में हुई महापंचायत एवं आंदोलन के दौरान किसानों के बीच आते थे। हालांकि भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का रुड़की और मंगलौर में आना जाना लगा रहता है। वह अक्सर किसानों के बीच पहुंच जाते हैं। 

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