वाणी में मधुरता और व्यवहार में विनम्रता ये कुलीन मनुष्यों की पहचान

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पहला, सीतापुर
आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो, घर हो या व्यापार, परिवार हो या सम्बंधी, अपने हों या पराये, आप जहां भी रहें शालीनता से रहें, आपका जीवन आदर्श बन जायेगा। वाणी में मधुरता और व्यवहार में विनम्रता ये कुलीन मनुष्यों की पहचान होती है। किसी के उच्च कुल या निम्न कुल की पहचान धन संपदा या दरिद्रता से नहीं उसकी शालीनता या रूक्ष व्यवहार से होती है। आपके पास कोई आता है और आप उसके सम्मान में खड़े हो जाते हैं। आप हंसकर उसका अभिवादन करते है, प्रेमपूर्ण आत्मीयत शब्दों द्वारा उसका सम्मान करते है तो आपको यह शालीनता उस आगंतुक अतिथि को आपका दीवाना बना देगी। वो आपसे मिलके जहां भी जायेगा आपके श्रेष्ठ व्यवहार की तारीफ करेगा।
यह बात स्थानीय दिगम्बर जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए भावलिंगी संत श्रमणाचार्य विमर्श सागर महाराज ने कही। उन्होने कहा कि इसके ठीक विपरीत आपने उसके साथ रूक्षता भरा व्यवहार किया तो वो व्यक्ति तुरंत निर्णय कर लेगा कि ये व्यक्ति व्यवहार रखने योग्य नहीं है। लगता है किसी नीच कुल में पैदा हुआ है। उन्होने वाणी को व्यक्तित्व का दर्पण बताते हुए कहा कि हमारे वचन बेहद कीमती होते है। वचनों का उपयोग ठीक उसी प्रकार करना चाहिए जिस प्रकार आप धन का उपयोग करते हैं। हमारे शब्द नपे तुले और शालीन होने चाहिए। कम शब्दों में काम की बात करने का हुनर आपके पास होना चाहिए। एक वे होते है जो बोलने के बाद सोचते हैं। एक वे होते हैं जो उसी समय अर्थात् बोलते हुए सोचते हैं और कुछ लोग ऐसे भी होते है तो बोलने से पहले ही सोच लिया करते हैं जो लोग बोलने के बाद सोचते है उनके पास सोचने के अलावा कुछ नहीं होता। लेकिन जो लोग बोलने से पहले सोचते है उन्हें फिर बोलने के बाद सोचना नहीं पड़ता। घरों से वर्तमान में ये नैतिकता के व्यवहार खोते जा रहे ळैं। घर में मां-बाप को चाहिए कि बच्चों के भविष्य निर्माण का दायित्व सिर्फ स्कूलों पर न छोड़े, आपके बच्चे आपके साथ ज्यादा रहते हैं।

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