शहीद बेटे को दिया मां ने कंधा

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15 दिन पहले सियाचिन के ग्लेशियर में आए बर्फीले तूफान की चपेट में आने से शहीद हुए पंजाब के गुरदासपुर जिले के गांव दबुर्जी निवासी 24 वर्षीय जवान परगट सिंह का रविवार शाम को अंतिम संस्कार किया गया। तूफान की चपेट में आने से घायल हुए जवान ने शनिवार रात को अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। शहीद परगट सिंह 21 पंजाब रेजिमेंट में तैनात थे। रविवार को शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। सैन्य सम्मान के साथ परगट सिंह का अंतिम संस्कार किया गया।

परगट सिंह की मां रोते हुए कह रही थी कि परगट सानू किते नहीं छड्ड के गया, मुड़ आएगा मेरा पुत्त। शहीद की दोनों बहनों ने भाई के सिर पर सेहरा सजाया और पिता प्रीतम सिंह ने मुखाग्नि दी। परगट परिवार का इकलौता बेटा था और अभी शादी नहीं हुई थी। परगट अपने पीछे पिता प्रीतम सिंह, माता सुखविंदर कौर और 2 बहनों को छोड़ गया। शहीद नवंबर 2020 में छोटी बहन अमनदीप कौर की शादी के लिए घर आया था।

कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर मोहम्मद इश्फाक, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की और सेना की टुकड़ी की ओर से सलामी दी गई। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 50 लाख रुपए एक्स ग्रेशिया और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। शहीद परगट सिंह 3 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। उनकी ड्यूटी सियाचिन ग्लेशियर में थी। 25 अप्रैल को आए बर्फीले तूफान के कारण 2 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि परगट सिंह गंभीर जख्मी हो गए थे। सैनिकों ने परगट को बर्फ से बाहर निकाला था। परगट का इलाज चंडीगढ़ के कमांडों अस्पताल में चल रहा था, जहां पर वह 13 दिन जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए वे हार गए। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि परगट सिंह ने देश के लिए अपनी जान दी है। परिवार हर तरह से मदद की जाएगी और गांव में प्रगट सिंह की यादगार बनाई जाएगी। सरकार ने 50 लाख रुपए एक्स ग्रेशिया और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि परिषद शहीद परिवार की हर संभव मदद करेगी। गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने की मांग की जाएगी।

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